नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द

Braj Vilasa — श्री ब्रजवासीदास

Verse 18 of 21

श्री वृंदावन धाम की, शोभा परम पुनीत। वरणी सके कवि कौन विधि, मन बुद्धि वचन अतीति॥ - श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास श्री वृन्दावन धाम की शोभा परम पावन है। वर्णि साके कवि कौन विधि, मन बुद्धि वचन अति.. - श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्दनवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द