नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द
Braj Vilasa — श्री ब्रजवासीदास
Verse 19 of 21
श्याम सदा वश प्रीतिके, तीन भुवन विख्यात॥
विना प्रीति नहिं पाइये, नन्दमहर को तात॥
- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
श्याम सदा प्रीति के वश में, तीन भुवन विख्यात... प्रीति बिन मैं नन्दमहार पिता नहीं.. - श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास