नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द

Braj Vilasa — श्री ब्रजवासीदास

Verse 3 of 21

अब ये लोचन श्याम के, सखी हमारे नाहिं। बसे श्याम रस रूपये, श्याम धसे इनमाहिं॥ - श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास अब यह लोचन श्याम का है, हमारे मित्र का नहीं। आधार श्याम रस रूपाए, श्याम धसे इनामहिं।।- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्दनवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द