नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द

Braj Vilasa — श्री ब्रजवासीदास

Verse 4 of 21

अति अद्भुत लावण्य निधि, श्री वृन्दावन चन्द। निगम नेति किमि वरणिये, रसिक नवल नंदनन्द॥ - श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास अति अद्भुत लावण्य निधि, श्री वृन्दावन चंद। निगम नेति किमी वरानिये, रसिक नवल नंदानंद।।- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्दनवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द