पायो बड़े भाग्यन सों आसरो किशोरी जू कौ

Chhutak Pada —

Verse 19 of 35

(कवित्त) पायो बड़े भाग्यन सों आसरो किशोरी जू कौ, ओर निरवाहि ताहि नीके गहि गहिरे। [1] नैननि सौं निरखि लड़ैती जू को वदन चन्द्र, ताही के चकोर ह्वैके रूपसुधा चहिरे॥ [2] स्वामिनी की कृपासों आधीन हुयी हैं 'ब्रजनिधि', ताते रसनासों सदां श्यामा नाम कहिरे। [3] मन मेरे मीत जोपै कह्यो माने मेरो तौं, राधा पद कंज कौ भ्रमर है के रहिरे॥ [4] - श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, हरि पद संग्रह (50) (कविता) पायो बड़े भाग्य पुत्र असारो किशोरी जू कौ, या निरवही ताहि नीके गहिह ​​गिहिरे। [1] नानी सौं निरखि लड़ैति जू को वदन चंद्रा, ताहि के चकोर हवैके रूपसुधा चाहरे.. [2] 'ब्रजनिधि' स्वामी की कृपा में आये, ताते रसांसो सदन श्यामा नाम कहेरे। [3] मेरे साथ मन खाओ, मैं पिता हूं, मन में राधा पद कंज बसाओ, जो भ्रम में है.. [4] - श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, हरि पद संग्रह (50)
देत सदा यमुना सुख राशि कोंनित्त सरद नित्त तीज है