नित्त सरद नित्त तीज है
Chhutak Pada —
Verse 20 of 35
आचारी सौं ठाकुर डरैं, ढिंग नहिं आवनि दैहिं।
प्रेमी साधु कौं उमँगि कै, रीझी अंक भरि लैहिं॥
- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (113)
अचारी सौन ठाकुर डारिन, मत झिझको। प्रेमी साधु कौन उमंगी कै, रीझी अंक भरी लहिन.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, विशेष पोस्ट एवन सखी (113)