नित्त सरद नित्त तीज है
Chhutak Pada —
Verse 23 of 35
हाथ हमारे सब कछू, दियौ बिहारिनी बाल।
अंग संग निरखें केलि सुख, अद्भुत प्रेम विसाल॥
- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (645)
हमारे सब कछुए हमारे हाथ में हैं, दीउ बिहारिणी बाल। तन से सुख ही दिखता है, अद्भुत प्रेम अपार.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, विशेष पोस्ट एवन सखी (645)