नित्त सरद नित्त तीज है
Chhutak Pada —
Verse 24 of 35
जाके हित में लाडिली, ताकौं विघन न कोई।
ताकौ बार न बॉकाई, जो जग बैरी होइ॥
- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (651)
जेके मार लाडिली, ताकौं विघ्न न कोय। ताकौ बर एन बोकाई, जो जग बैरी होई.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, विशेष पोस्ट एवन सखी (651)