अब तो कहिबे की न रही
Chhutak Pada —
Verse 3 of 35
अब तो यही बात मनमानी।
छाँड़ौं नहीं श्याम श्यामा की वृन्दावन रजधानी॥ [1]
भ्रमयो बहुत लघुधाम विलोकत छिनभंगुर दुखदानी।
सर्वोपरी आनन्द अखण्डित सो जिय ठौर सुहानी॥ [2]
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह), श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक पद (74)
अब यह मनमाना है. वृन्दावन श्यामा श्यामा की राजधानी है, चांदौन की नहीं.. [1] माया का बहुत छोटा निवास, खंडित, नाजुक और उदास। परम आनंद अखंड है, अत: रमणीय स्थान में निवास करो.. [2] - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिन्हा), श्री नागरीदास जी के वचन, चुटक पद (74)