अब तो कहिबे की न रही
Chhutak Pada —
Verse 9 of 35
हमारी अब सब बनी भली हैं। [1]
कुंजमहल की टहल दई मोहि जहाँ नीति रंग रली हैं॥ [2]
साहिब श्यामा श्याम उसीली ललिता ललित अली हैं। [3]
नागरिया पैं कृपा करी अति श्री वृषभान लली हैं॥ [4]
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक पद (86)
अब हमारे लिए सब कुछ ठीक है. [1] कुंजमहल में चलते-चलते, जहां नीति रंग राली... [2] साहेब श्यामा श्याम वही ललिता ललित अली हैं। [3] नगरिया दर्द कृपा अति श्री वृषभान लाली है.. [4] - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, छुटक पद (86)