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चंद्रसखी पदावाली
चंद्रसखी पदावाली
Chndrasakhi Padavali
श्री चन्द्रसखी जी · 3 verses · Braj
1. ब्रज की रज मैं भई क्यों न बीर
2. ब्रज की रज मैं भई क्यों न बीर
3. तेरो मुख नीको कि मेरो स्यामा प्यारी