मेरे कलिकल्मष कुल नासे
Gadadhar Bhatt Vani — श्री गदाधर भट्ट
Verse 6 of 10
(राग भैरवी)
मेरे कलिकल्मष कुल नासे,
देखि प्रवाह प्रभाकर कन्या। [1]
वह देखो पाप जात जित तित बहे,
ज्यों मृगराज देखि मृग सैन्या॥ [2]
दै पय पान पूत लौं पौषति
जननि कृतारथ धनि बहु धन्या। [3]
दीनो चहति गदाधरजू पै,
चरन सरन अति प्रीति अनन्या॥ [4]
- श्री गदाधर भट्ट, श्री गदाधर भट्ट जी की वाणी (19)
(राग भैरवी) मेरे कलिकालमश कुल नासे, प्रवाह देखो प्रभाकर कन्या। [1] वाह! देखो, जैसे मृगों का राजा मृगों की सेना को विदा करता है, वैसे ही जाति का पाप धुल जाता है.. [2] मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मुझे एक सुपोषित माँ, एक कृतज्ञ माँ और एक समृद्ध बहू मिली है। [3] दयो चाहति गदाधर्जु पै, चरण सरण अति प्रीति अनन्या। [4] - श्री गदाधर भट्ट, श्री गदाधर भट्ट का भाषण (19)