रँगीली जोरी की बलि जाँव

Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद

Verse 12 of 48

जो कछु है सो राधिका, मो कछु और न चाह। राधा-पद-पन-पैज को, राधा-हाथ निबाह॥ - श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (82) जो कछुआ है वही राधिका है, न कछुआ है, न इच्छा है। राधा-पद-पना-पैज को, राधा-हठ निबाह.. - श्री आनंदघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (82)
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