रँगीली जोरी की बलि जाँव
Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद
Verse 13 of 48
जो तुम बनावौगे सोई बनिहै मेरो सोच कहा।
अब लौ तुम सब नीकी बनाई बनाइहौ नीकी महा। [1]
मंगलमूरति सब सुखदायक ब्रजनायक गुन-निकर अहा।
दीन पपीहा त्यौं ढरिबो आनँदघन टेक लहा॥ [2]
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, पदावली (720)
तुम जो भी बनाओगे वह मेरे मन में बनेगा। अब आप सभी निक्की, निक्की महा बन गई हैं. [1] मंगलमूर्ति में समस्त सुखदायक ब्रजनायक गुण विद्यमान हैं। दीन पपीहा तू धरिबो अन्नघन टेक लहा.. [2] - श्री आनंदघन जी, घनानंद ग्रंथावली, पदावली (720)