रँगीली जोरी की बलि जाँव

Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद

Verse 16 of 48

कृपा करैं ब्रजनाथ जौ, ब्रजदरसन कै नैंन। या ब्रजबन की माधुरी, तौ परसै उर-एन॥ - श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (7) कृपा करो ब्रजनाथ जौ, ब्रजदर्शन के नयन। या ब्रजबाण की मधुरता, तौ परसाई उर-ना.. - श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (7) यदि ब्रजनाथ कृपा करें, तभी आंखें ब्रज को देख सकती हैं, तभी ब्रज की मधुरता हृदय को छू सकती है, अन्यता नहीं।
रँगीली जोरी की बलि जाँवरँगीली जोरी की बलि जाँव