रँगीली जोरी की बलि जाँव

Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद

Verse 17 of 48

ललित फागु रचना रची, बिलसत सरस बसंत। जै जै राधा माधवी, जै बनमाली कंत॥ - श्री घनानंद जी, घनानंद ग्रंथावली, सरस वसंत (66) ललित फागू लिखित, बिलासत सरस बसंत। जय जय राधा माधवी, जय बनमाली संगत.. - श्री घनानंद जी, घनानंद ग्रंथावली, सरस वसंत (66)
रँगीली जोरी की बलि जाँवरँगीली जोरी की बलि जाँव