रँगीली जोरी की बलि जाँव
Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद
Verse 18 of 48
मधुर केलिरस-झेलि सों, रसना स्वाद-सुरूप।
सुफल सुबानी बेलि को, राधा नाम अनूप॥
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (69)
मीठा, मीठा, मीठा, मीठा, मीठा, मीठा और स्वादिष्ट। सुफल सुबनि बेलि को, राधा नाम अनुप.. - श्री आनंदघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (69)