रँगीली जोरी की बलि जाँव
Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद
Verse 19 of 48
मेंहदी रची कुंवरि के पाइन।
कोमल नख सु रहे अति सुन्दर,
झलकत विविध बनाइन॥ [1]
रूचिर अंगुरियन सोहत विछुवा,
मंजुल जटित जराइन।
ले ले रसिक लाल हाथन पै,
अवलोकत चित चाइन॥ [2]
नैनन छुबाई छुबाई उर लावत,
सुख पावत बहु भाइन।
'आनन्दघन' पिय चतुर शिरोमनि,
कौतिक केलि पराइन॥ [3]
- श्री घनानंद जी, घनानंद ग्रंथावली
मेंहदी से रंगी कुंआरी की व्यथा. मृदुल नख सुन रहे अति सुन्दर, झलक हो रही विविध।।[1] रुचिर उँगलियाँ सोहत विचुवा, मंजुल जतीत जारेन। गुलाबी लाल हाथी ले लो, मुझे मानसिक शांति दो। 'आनंदघन' पिया चतुर मुखिया है, नश्वर संसार से पराया। [3] - श्री घनानन्द जी, घनानन्द ग्रन्थावली