रँगीली जोरी की बलि जाँव
Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद
Verse 21 of 48
मोहन मदनगुपाल को, मोहन यह ब्रज देस।
अति उदार भागनि भर्यौ, राजत नंद नरेस॥
- श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (11)
मोहन से मदनगुपाल, मोहन यह ब्रज देश। अति उदार भगनि भरयौ, रजत नन्द नरेस।।- श्री अन्नघन, घनानन्द ग्रन्थावली, ब्रजविलास (11)