रँगीली जोरी की बलि जाँव

Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद

Verse 22 of 48

मोहि दीजै जू ब्रजवास। सुनौ नंद बृषभानराय जू पुजवौ जिय की आस॥ [1] नीके रहौ राधिका-मोहन दिन दिन अधिक हुलास। आनँदघन छाउँ गुन गाउँ दुहुँ घर के चहुँ पास॥ [2] - श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, पदावली (755) मोहि दीजै जु ब्रजवास। सुनो नन्द बृषभनराई जू पूजवौ जिया की अस.. [1] नइके रहो राधिका-मोहन दीन दीन अधिक जानकारी। आनंदघन चौ गुन गौं दुहुं घर के चहुं पास.. [2] - श्री आनंदघन जी, घनानंद ग्रंथावली, पदावली (755)
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