रँगीली जोरी की बलि जाँव
Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद
Verse 23 of 48
पहचानै हरि कौन, मो से अनपहचान कों।
त्यौं पुकार मधि-मौन, कृपा-कान मधि नैंन ज्यौं॥
- श्री घनानंद जी, घनानंद ग्रंथावली
कौन है अज्ञात हरि, कौन है मुझको अज्ञात। आप कहते हैं मधि-मौन, अनुग्रह-कण मधि-नानन अस.. - श्री घनानंद जी, घनानंद ग्रंथावली