रँगीली जोरी की बलि जाँव
Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद
Verse 24 of 48
श्रीब्रजमोहन -माधुरी, रही नैन-मन छाय।
अद्भुत रस आनंदघन, प्यासै बढ़ति अघाय॥
- श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (69)
श्री ब्रजमोहन-माधुरी, नैना-मन छायी। अद्भुत रस आनंदघन, प्यसै बाधाति अघाय.. - श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (69)