रँगीली जोरी की बलि जाँव

Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद

Verse 25 of 48

प्रेमरंग-रस-रगमगी, सुंदर ब्रजबन-भूमि। ब्रजजीवन आनंदघन, हित बरसत नित झूमि॥ - श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (9) प्रेमरंग-रस-रागमगी, सुन्दर ब्रजबन-भूमि। ब्रजजीवन आनंदघन, हित बरसात नित झूमि.. - श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (9)
रँगीली जोरी की बलि जाँवराधा माधौ बिहरै बन मैं