रँगीली जोरी की बलि जाँव
Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद
Verse 28 of 48
राधा मेरी संपदा, जिय की जीवन-मूल।
राधा राधा रट सदा, रोम-रोम अनुकूल॥
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (79)
राधा मेरी प्रिया है, मेरे जीवन का आधार है। राधा राधा रात्रि सदा, रोमा-रोमा अनुकूल.. - श्री आनंदघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (79)