रँगीली जोरी की बलि जाँव
Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद
Verse 29 of 48
राधा मोहन मुख लगी, मुरली ह्वै दिन राति।
राधा ही राधा बजै, अति मोहनी धुनि जाति॥
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रियाप्रसाद (80)
राधामोहन, मेरे सामने रात-दिन बजती है बांसुरी। राधा बन जाती है राधा, बन जाती है अति मनमोहक... - श्री आनंदघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रियप्रसाद (80)