रँगीली जोरी की बलि जाँव

Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद

Verse 31 of 48

राधा रास-सिरोमनी, राधा केलि-कुलीन। राधा सकल कला-भरी, रसमूरति हितलीन॥ - श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (81) राधा रस-सिरोमणि, राधा केलि-कुलीन। राधा सकल कला-भारी, रसमूर्ति हितलीन.. - श्री आनंदघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (81)
राधा राधा रटि राधा राधा रटि मेरीरँगीली जोरी की बलि जाँव