रँगीली जोरी की बलि जाँव

Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद

Verse 33 of 48

(राग सारंग, इकताला) रँगीली जोरी की बलि जाँव, ललित रूप-गुन-रासि। कदम-मूल बन घर है जाको जमुना-कुल सुठाँव। [1] गोरी साँवरी दृगनि भाँवरी निरखें सुखनि सिहाँव। आनँदघन जीवन-धन-दायक राधा-मोहन नाँव॥ [2] - श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, पदावली (795) (राग सारंग, इक्ताल) रंग-बिरंगी डोरी की बाली, सुन्दर रूप-गुण-रासी। सौतन बन घर जाइये, जमुना-कुल सुथानव। [1] गौर वर्ण दृगणि भँवरि निराखें सुखानि सिहाँव। आनंदघन जीवन-धन दाता, राधा-मोहन नानाव.. [2] - श्री आनंदघन जी, घनानंद ग्रंथावली, पदावली (795)
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