रँगीली जोरी की बलि जाँव

Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद

Verse 35 of 48

(कवित्त) रसिक-सिरोमनि सुजान सुधानिधि हू की, रसना रसैबे कौं रसीलो रसधाम है। [1] जीवन बरसिबे आनंदघन आपुन पैं, चातिक तें कोटिगुनी जक आठो जाम है॥ [2] आरति पराई सोई जानै न बखानें बनै, देखें दसा औरे बिसरत बिसराम है। [3] साधा तन हेरियै निबेरियै सु बाधा वारि, प्राननि आधार तिन्हैं राधा राधा नाम है॥ [4] - श्री घनानंद जी, घनानंद ग्रंथावली, सुजान हित (208) (कविता) रसिका-सिरोमणि सुजन सुधानिधि हूं की, रसना रसइबे कौन रसिलो रसाधम। [1] जीवन पौरसिबे आनंदघन अपुन दर्द, चटिक तेन कोटिगुणी जक आठो जम है.. [2] आरती परै सोइ जनै बखाने बनै, देखन दासा और बिसरत बिसाराम है। [3].
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