रँगीली जोरी की बलि जाँव
Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद
Verse 36 of 48
सब-सुख-सोभा-मूल बृंदावन धन मेरे।
राधा-मोहन गाउँ न्हाउँ जमुना साँझ-सबेरे॥ [1]
प्रेममंडली दरसन पाउँ धीरसमीर बेनुबट नेरे।
आनँदघन झर सदा लगाउँ नितबिहार-हित हेरे॥ [2]
- श्री आनंदघन जी, घनानंद ग्रंथावली, पदावली (759)
सबा-सुखा-सोभा-मूल बृंदावन मेरी संपत्ति है। राधा-मोहन गौं न्हौं जमुना संझा-सबेरे.. [1] प्रेममंडली दरसन पौं धीरसमिर बेनुबत नेरे। आनंदघन झरना यहाँ सदा प्रिय है.. [2] - श्री आनंदघन जी, घनानंद ग्रंथावली, पदावली (759)