बृंदावन नीको लागै है

Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद

Verse 37 of 48

(राग कालिंगडा, इकताला) बृंदावन नीको लागै है। सजल सघन स्यामसुंदर-प्रेम-बागै है। जमुना कें तट मोहन महा हियाराँ खागै है। आनँदघन मुरलिका-धुनि कोकिला रागै है॥ - श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, पदावली (721) (राग कलिंगदा, इकतला) बृंदावन नीको लगाया गया है। पानी गाढ़ा, सुंदर और प्रेम से भरा है। मोहन महा मृग जमुना के तट पर चर रहा है। आनंदघन मुरलिका-धुनी कोकिला रागाई है... - श्री आनंदघन जी, घनानंद ग्रंथावली, पदावली (721)
रँगीली जोरी की बलि जाँवऐसें आरती करौ