नित बिहार बृंदावन राधा मोहन
Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद
Verse 39 of 48
देख्यौ देख्यौ राधा को बृंदावन देख्यौ।
जीवन जनम करम अपनो सब भाँति सफल करि लेख्यौ॥ [1]
जमुना के तट सजल स्यामघन सब दिन सहज सुहायौ।
दंपति सुख-संपत्ति निज मंदिर हित-मंडप नित छायौ॥ [2]
सब तें ऊँचो लसत पुहमि पै दीसत दूरि दुरायौ।
अमल अखंडित अतुलित महिमा अदभुत निगमनि गायौ॥ [3]
मोहन महा मदनमोहन को बानक बरनौं कैसे।
दरस्यौ बरस्यौ करौ सदाई आनँदघन यह ऐसे॥ [4]
- श्री आनन्दघन जी, श्री घनानंद ग्रंथावली, पदावली (690)
देखो, देखो, राधा को देखो, बृंदावन को देखो। अपने जीवन के कार्यों को हर संभव तरीके से सफल बनाएं.. [1] यमुना नदी के जल में आपके सभी दिन आरामदायक हों। दंपत्ति के सुख-संपदा, निज मंदिर, निज कल्याण, नित छयौ.. [2] सब तेन इको लसत पुहमि पै दिस दुरि दुरायौ। अमल अखण्ड अतुलनीय महिमा अद्भुत निगमनि गयौ। [3] मोहन महा मदन मोहन बरनौन कैसे बनायें। दरस्यायौ बारौ करौ सदाय आनंदघन या ऐसे।।[4] - श्री आनंदघन जी, श्री घनानंद ग्रंथावली, पदावली (690)