रँगीली जोरी की बलि जाँव
Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद
Verse 4 of 48
ब्रजबिलास रसरीति को, करियै कहा बखान।
कृष्णचंद क्रीड़त जहाँ, पूरन - कला - निधान॥
- श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (16)
बताओ ब्रजबिलास रसरिति। कृष्णचंद क्रीदत जहां, पुराण - कला - निधान.. - श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (16)