रँगीली जोरी की बलि जाँव

Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद

Verse 5 of 48

ब्रजमोहन ब्रज मैं बसै, नित ब्रजमंगल रूप। घर बाहिर व्यापक सदा, मंगलचरित अनूप॥ - श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (15) ब्रजमोहन, ब्रजमंगल के रूप में प्रतिदिन ब्रज में निवास करते हैं। घर के बाहर सदैव व्यापक, शुभ और अद्वितीय.. - श्री अन्नघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (15)
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