रँगीली जोरी की बलि जाँव
Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद
Verse 6 of 48
ब्रजमोहन उर अवनि में, राधा-सुपद-विहार।
रोम रोम आनन्दघन, भीजे रसिक उदार॥
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (75)
ब्रजमोहन उर अवनि पुरुष, राधा-सुपद-विहार। रोम रोम आनंदघन, भीजे रसिक उदार.. - श्री आनंदघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिय प्रसाद (75)