छबीलो रसिकराय नवरंग
Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद
Verse 7 of 48
(राग बिलावल, इकताला )
छबीलो रसिकराय नवरंग।
सुंदर बर मुरलीधर प्यारो ब्रजमोहन सब अंग॥ [1]
ब्रज की सोभा मंगलमूरति ग्वालमंडली-संग।
उनै उनै बरसत आनँदघन दिन अनुराग अभंग॥ [2]
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, पदावली (698)
(राग बिलावल, इकतला) छबीलो रसिकराय नवरंग। सुन्दर भाई मुरलीधर, प्रिय ब्रजमोहन, सब अंग। [1] ब्रज की शोभा मंगलमूर्ति ग्वालमंडली से है। उनै उनै बरसत आनंदघन दिन अनुराग अभंग.. [2] - श्री आनंदघन जी, घनानंद ग्रंथावली, पदावली (698)