रँगीली जोरी की बलि जाँव

Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद

Verse 8 of 48

दोऊ मिलि एकै भए, ललित रंगीली जोट। जमुना-तट निरखौं सदा, तरु बेलिनि की ओट॥ - श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिया प्रसाद (73) दोऊ मिलि एक भये, ललित रंगली जोत। जमुना-तट निरखौं सदा, तरु बेलिनी की ओट.. - श्री आनंदघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रिय प्रसाद (73)
छबीलो रसिकराय नवरंगरँगीली जोरी की बलि जाँव