रँगीली जोरी की बलि जाँव
Ghanananda Granthavali — श्री घनानंद
Verse 9 of 48
(कवित्त)
गुरनि बतायौ राधा मोहन हूँ गायौ,
सदा सुखद सुहायौ वृन्दावन गाढ़ें गहि रे। [1]
अद्भुत अभूत महि मंडल परे तें परे,
जीवन को लाहु हा-हा क्यों न लहै रे॥ [2]
आनन्द को घन छायो रहत निरन्तर ही,
सरल सुदेय सो पपीहा पन बह रे। [3]
जमुना के तीर केलि कोलाहल भीर,
ऐसे पावन पुलिन पे पतित परयो रह रे॥ [4]
- श्री घनानंद जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रेम पत्रिका (51)
(कविता) गुरु कहो राधा मोहन, मैं तो गया, तुम सदा सुखी, रसातल में है वृन्दावन। [1] अद्भुत, अति सुंदर वृत्त, दस जोड़े, जीवन का रक्त हा-हा, क्यों नहीं.. [2] आनंद को घन छयो रहत, सरल सुदे सो पपीहा पान बहा रे। [3] बहुत शोर है यमुना के किनारे, पवन पुल पर रहते हैं ऐसे गिरे हुए अजनबी.. [4] - श्री घनानंद जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रेम पत्रिका (51)