आजु बनी अति सारंग नैनी

Govind Svami Vani — श्री गोविन्द स्वामी

Verse 1 of 26

(राग ईमन ) आजु बनी अति सारंग नैनी। मदनमोहन पिय रचि पचि कर, गूथि बनाई बेनी॥ [1] मृग मद तिलक, लिखत भाल सकल, कलागुननिधान रूप की एनी। 'गोविंद' प्रभु रस बस कीने सोहाग तें मदनमोहन सुख देनी॥ [2] - श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (461) (राग ईमान) अजु बानी अति सारंग नैनी। मदन मोहन पिया रचि पछि कर, गुठी बनै ​​बेनी..[1] मृग मद तिलक, लेखन भले ही स्थूल हो, स्वरूप कालजयी है। 'गोविंद' प्रभु रस बस की सोहाग, तेन मदनमोहन सुख देनी.. [2] - श्री गोविंद स्वामी, श्री गोविंद स्वामी जी की वाणी (461)
आजु बनी री कुञ्जेश्वरी रानी