आजु बनी री कुञ्जेश्वरी रानी
Govind Svami Vani — श्री गोविन्द स्वामी
Verse 2 of 26
(राग केदारो)
आजु बनी री कुञ्जेश्वरी रानी।
चारू चिकुर सिथिल सगबगां, विविध कुसुम बेंनी बानी॥ [1]
नैन सुरंग गिरिधर रसमाते, कमल खंजन सोभा बिलखानी।
‘गोविंद’ प्रभु कों तू न्याइन बस करति धनि धनि री
विधना आपुन चतुराई सकल तोमें आनी॥ [2]
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी
(राग केदारो) आजु बानी री कुंयजेश्वरी रानी। चारु चिकुर सिथिल सागबागान, विविध कुसुम बेनी बानी। [1] नैन सुरंग गिरिधर रसमते, कमाल खंजन शोभा बिलखानी। 'गोविंदा' प्रभु, आप कौन हैं, केवल अपनी चतुराई और पैसे से अमीरों को अमीर बना रहे हैं... [2] - श्री गोविंद स्वामी, श्री गोविंद स्वामी जी के शब्द