दूलह मदनगोपाल राधा नव दुलही
Hit Chaurasi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 1 of 43
(राग धनाश्री)
आज नीकी बनी श्रीराधिका नागरी।
ब्रज जुवति जूथ में रूप अरु चतुरई,
सील सिंगार गुन सबनितें आगरी॥
कमल दक्षिण भुजा वाम भुज अंस सखि,
गाँवती सरस मिलि मधुर सुर राग री।
सकल विद्या विदित रहसि 'हरिवंश हित’,
मिलत नव कुञ्ज वर स्याम बड़ भाग री॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, हित चौरासी (25)
(राग धनाश्री) अज निकी बानी श्रीराधिका नागरी। ब्रज जुवति जूठ में रूप अरु चतुराई, सिल सिंगार गुन सबनितेन आगरी.. कमल दक्षिण भुज वाम भुज अंस सखी, गणवती सरस मिलि मधुर सुर राग री। सकल विद्या विदित रहसी 'हरिवंश हित', मिलत नव कुंज वर स्याम बड़ा भाग री.. - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, हित चौरासी (25)