श्री हित चौरासी
Hit Chaurasi
श्री हित हरिवंश महाप्रभु · 43 verses · Braj
- 1. दूलह मदनगोपाल राधा नव दुलही
- 2. आजु बन राजत जुगल किसोर
- 3. आजु देखि व्रज सुन्दरी मोहन बनी केलि
- 4. दूलह मदनगोपाल राधा नव दुलही
- 5. बनी श्रीराधा मोहन की जोरी
- 6. प्यारे बोली भामिनी, आजु नीकी जामिनी
- 7. प्यारे बोली भामिनी, आजु नीकी जामिनी
- 8. राधा प्यारी तेरे नैंन सलोल
- 9. अति ही अरुन तेरे नयन नलिन री
- 10. राधा प्यारी तेरे नैंन सलोल
- 11. यह जु एक मन बहुत ठौर करि
- 12. महाप्रभु श्री हित चौरासी (64) हे मित्र! वंशीवट में श्रीकृष्
- 13. बनी श्रीराधा मोहन की जोरी
- 14. हौं तेरे वारनें मंद गति चलि
- 15. बनी श्रीराधा मोहन की जोरी
- 16. ऐसैं बसिऐ ब्रज की बीथिनि
- 17. बनी श्रीराधा मोहन की जोरी
- 18. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
- 19. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
- 20. राधा प्यारी तेरे नैंन सलोल
- 21. कुंजबिहारी कौ बसन्त सखि
- 22. राधा प्यारी तेरे नैंन सलोल
- 23. (जै श्री) हित हरिवंश प्रताप रूप गुन वय बल स्याम उजागर । जाक
- 24. काहे कौं मान बढ़ावतु है
- 25. कुंज महल रंग हो हो होरी
- 26. प्यारे बोली भामिनी, आजु नीकी जामिनी
- 27. काहे कौं मान बढ़ावतु है
- 28. राधा प्यारी तेरे नैंन सलोल
- 29. बिलसत प्यारी-लाल कुंज रजनी
- 30. राधा प्यारी तेरे नैंन सलोल
- 31. प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
- 32. प्यारे बोली भामिनी, आजु नीकी जामिनी
- 33. प्रथम जथामति प्रनऊँ, श्री वृन्दावन अति रम्य।
- 34. ऐसैं बसिऐ ब्रज की बीथिनि
- 35. बनी श्रीराधा मोहन की जोरी
- 36. प्यारे बोली भामिनी, आजु नीकी जामिनी
- 37. राधा प्यारी तेरे नैंन सलोल
- 38. वृषभानु कुँवरि खेलति बसंत
- 39. काहे कौं मान बढ़ावतु है
- 40. राधा प्यारी तेरे नैंन सलोल
- 41. बनी श्रीराधा मोहन की जोरी
- 42. यह जु एक मन बहुत ठौर करि
- 43. प्रीति की रीति रंगीलो ही जाने