(जै श्री) हित हरिवंश प्रताप रूप गुन वय बल स्याम उजागर । जाक

Hit Chaurasi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 23 of 43

(जै श्री) हित हरिवंश प्रताप रूप गुन वय बल स्याम उजागर । जाकी भ्रू विलास बस पसुरिव दिन विथकत रस सागर॥ - मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु, हित चौरासी (52) (जय श्री) मारो हरिवंश प्रताप का रूप, गुण और शक्ति उजागर। जाकी भारु विलास बस पसुरिव दिन विकट रस सागर.. - मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु, हित चौरासी (52)
राधा प्यारी तेरे नैंन सलोलकाहे कौं मान बढ़ावतु है