प्यारे बोली भामिनी, आजु नीकी जामिनी

Hit Chaurasi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 26 of 43

(राग विभास) कौन चतुर जुवती प्रिया, जाहि मिलत लाल चोर ह्वै रैंन। [1] दुरवत क्यौंऽब दूरै सुनि प्यारे, रंग में गहले चैन में नैंन। [2] उर नख चंद विराने पट, अटपटे से बैंन। [3] (जै श्री) हित हरिवंश रसिक राधापति प्रमथित मैंन॥ [4] - श्री हरिवंश महाप्रभू, श्री हित चौरासी (6) (राग विभास) प्रिया इतनी चतुर लड़की है, लाल चोर कहां से आ जाती है? [1] मेरी बात सुनो प्रिय, मेरी आंखें गहरी शांति से भर गई हैं। [2] तेरी नाक से कुछ एकाकी पत्ते, गर्मी से अभिशाप। [3] (जय श्री) हित हरिवंश रसिक राधापति प्रमथित मैं.. [4] - श्री हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (6)
कुंज महल रंग हो हो होरीकाहे कौं मान बढ़ावतु है