राधा प्यारी तेरे नैंन सलोल
Hit Chaurasi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 28 of 43
(राग धनाश्री)
मोहनलाल के रसमाती।
वधू गुपत गोवति कत मोसौं, प्रथम नेह सकुचाती॥ [1]
देखि सँभार पीत पट ऊपर, कहाँ चूनरी राती।
टूटी लर लटकति मोतिनु की, नख-विधु अंकित छाती॥ [2]
अधर-बिम्ब खंडित, मषि मंडित गंड, चलत अरूझाती।
अरुन नैन घूमत आलस जुत, कुसुम गलित लट पाती॥ [3]
आजु रहसि मोहन सब लूटी, विविध आपनी थाती।
(जैश्री) हित हरिवंश वचन सुनि भामिनि, भवन चली मुसिकाती॥ [4]
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (20)
(राग धनाश्री) मोहनलाल की रसमती। सावन के महीने में गाय काटने का है दुल्हन का राज, पहले करें इसका ख्याल... [1] ऊपर पीले पर्दे को देखो, चुनरी की रात कहां है। मोतिनु की लार टूटी, विधवा के नख छपे.. [2] छवि का आधा भाग टूटा, दुःख फीका, क्रोध द्रवित हुआ। अरुण नैन घुम्मत अलस जुट, कुसुम गलित लत पति.. [3] अजु रहसी मोहन, सब लुटि, विविध अपनी थाठी। (जयश्री) हित हरिवंश वचन सुनि भामिनी, भवन चली संगति.. [4] - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (20)