राधा प्यारी तेरे नैंन सलोल
Hit Chaurasi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 30 of 43
(राग धनाश्री)
नैंननिं पर वारौं कोटिक खंजन।
चंचल चपल अरुन अनियारे, अग्रभाग बन्यौ अंजन॥ [1]
रुचिर मनोहर वक्र विलोकनि, सुरत समर दल गंजन।
(जै श्री) हित हरिवंश कहत न बनै छबि, सुख समुद्र मन रंजन॥ [2]
- श्री हरिवंश महाप्रभु , श्री हित चौरासी (22)
(राग धनाश्री) नैन्ननिन पर वरौं कोटिक खंजन। चंचल चपल अरुण अनियारे, अग्रभाग बनायौ अंजन..[1] रुचिर मनोहर वक्र विलोकनि, सुरत समर दल गुंजन। (जय श्री) हित हरिवंश कहते हैं कि खुशी कोई छवि नहीं है, खुशी तो मन का सागर है... [2] - श्री हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (22)