प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै
Hit Chaurasi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 31 of 43
(राग मल्हार) [वर्षा समय]
नयौ नेह नव रंग नयौ रस, नवल स्याम वृषभानु किसोरी।
नव पीतांबर नवल चूनरी, नई नई बूंदनि भींजति गोरी॥
नव वृन्दावन हरित मनोहर, नव चातक बोलत मोर मोरी।
नव मुरली जु मलार नई गतिः, श्रवन सुनत आये घन घोरी॥
नव भूषन नव मुकुट विराजत, नई नई उरप लेत थोरी थोरी।
(जै श्री) हित हरिवंश असीस देत मुख, चिरजीवी भूतल यह जोरी॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चतुरासी (54)
(राग मल्हारा) [वर्षा समय] नयौ नेह नव रंग नयौ रस, नवल स्याम वृषभानु किसोरी। नया पीतानबार, नई चुनरी, नई बुंदनी, झिलमिलाती सफेद... नया वृन्दावन, हरा, सुंदर, नया मोर बोला। नव मुरली जू मलार नै गति, श्रवण सुनत ऐ घन घोरी.. नव भूषण नव मुकुट विराजत, न नै उरप लेत थोरी थोरी। (जय श्री) हित हरिवंश मुख से आशीर्वाद, यह अनंत सतह.. - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चतुर्सी (54)