ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित

Hit Sfut Vani — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 2 of 26

आनँद आजु नंद के द्वार। दास अनन्य भजन - रस कारन, प्रगटे लाल मनोहर ग्वार॥ [1] चंदन सकल धेनु तन मंडित कुसुम दाम रंजित आगार। [2] पूरन कुंभ बने तोरन पर बीच रुचिर पीपर की डार॥ [3] युवति-यूथ मिलि गोप विराजत, बाजत पणव मृदङ्ग सुतार। [4] (जै श्री) हित हरिवंश अजिर वन वीथिनु, दधि मधि दूध हरद के खार॥ [5] - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित स्फुट वाणी (11) और आज नन्द के द्वार। दास अन्य भजन - रस करण, प्रगटे लाल मनोहर ग्वार.. [1] चंदन सकल धेनु तन मंडित कुसुम दम रंजीत अगर। [2] पूरन कुम्भ के मेहराब रुचिर पीपर के डार से बनाये गये थे। [3] बालिका-युवक मिलि गोप विराजत, बाजत पनव मृदंग सुतार। [4] (जय श्री) हित हरिवंश अजिर वन विथिनु, दधि मधि दूध हरद के खर.. [5] - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित स्फुट वाणी (11)
ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासितना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित