ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित
Hit Sfut Vani — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 8 of 26
मैं जु मोहन सुन्यौ बेनु गोपाल कौ। [1]
व्योम मुनि यान, सुन नारि सुनि चकित भई,
कहत नहीं बनत कछु भेद यति ताल कौ॥ [2]
श्रवन कुंडल छुरित, रूरत कुंतल ललित,
रूचिर कस्तूरि चंदन तिलक भाल कौ। [3]
चंद-गति मंद भई, निरखि छवि काम गहि,
देखि हरिवंश हित वेष नंदलाल कौ॥ [4]
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित स्फुट वाणी (13)
मैं मोहन सुनायौ बेनु गोपाल। [1]. [3] पोस्ट की गति धीमी है भाई, बिना छवि के ही काम आती है, देखिये हरिवंश हित भेषधारी नंदलाल कौ.. [4] - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित स्पष्ट वाणी (13)