मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग

Hriday Sarvasva — श्री वंशी अलि

Verse 16 of 31

नरक पड़न आछो लगे, कुमरि चरण के हेत। तिन चरणन बिन नहि चहौं, सुन्दर कुंज निकेत॥ - श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (26) कुमारी चरण को नरक में जाना भी अच्छा लगा। तीन चरण बिन चाहे, सुन्दर उपवन निकेत.. - श्री वंशी अली, हृदय ही सब कुछ है (26)
मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँगमोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग