मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग

Hriday Sarvasva — श्री वंशी अलि

Verse 25 of 31

रुचिर धाम वृंदाविपिन, पुर वृषभान उदार। जामैं गह्वर वाटिका, तामैं नित्य विहार॥ - श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (1) रुचिर धाम वृंदाविपिन, पुर वृषभान उदार। ज़मीन गहवर वाटिका, तमन नित्य विहार.. - श्री वंशी अली, हृदय सर्वस्व (1)
मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँगमोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग